Friday, June 12, 2009

अमर उजाला में कुदरतनामा

अमर उजाला में कुदरतनामा का लेख "क्या घड़ियाल सचमुच रोते हैं?" छपा है। इसकी सूचना और कटिंग मुझे गिरिजेश राव ने भेजी।

4 comments:

अजय कुमार झा said...

अरे वाह सुब्रमनियम जी..बहुत बढिया ..घडियालों ने आपको प्रसिद्द कर दिया ...mubaarak हो आपको और घडियालों को भी ...aanand आ गया...

बालसुब्रमण्यम said...

अजय कुमार झा: आप शायद झगड़ा करवाना चाहते हैं मुझमें और आलसी जी में। आपने घड़ियालों की तारीफ के पुल बांध दिए, पर आलसी जी (गिरिजेश राव) का जिक्र भी नहीं किया। यहीं गलती तो अमर उजाला ने भी की, और इसके लिए मुझे राव साहब से खूब खरी-कोटी सुननी पड़ी। दरअसल, घड़ियाली आसू का ओरिजिनल आइडिया उन्हीं का था, और अमर उजाला ने, और अपने भी, उनको क्रेडिट न देकर घोर अन्याय किया उनके प्रति। कुछ प्रतिकार कीजिए, वरना हम तो कहीं छिपने को चले! ये लखनऊ वाले बड़े खतरनाक होते हैं, मैं जानता हूं, वहां रह चुका हूं।

परमजीत बाली said...

आप को बहुत बहुत बधाई।

अल्पना वर्मा said...

bahut bahut badhaayee

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