Monday, June 1, 2009

हमारे पक्षी मित्र : हुदहुद


हुदहुद हमारा खूब परिचित पक्षी है। उसे बहुत लोग कठफोड़ा समझ बैठते हैं। पर ये दोनों अलग-अलग वर्ग के पक्षी हैं।

हुदहुद मैना जितना होता है। उसका शरीर 30 सेंटीमीटर लंबा होता है। उसके उजले बादामी रंग के बदन पर जेबरे के समान काली-सफेद पट्टियां होती हैं। गले और छाती का रंग हल्का होता है। पेट सफेदी लिए होता है। चोंच लगभग 5 सेंटीमीटर लंबी, घुमावदार, नुकीली और काली होती है। माथे पर बादामी रंग की कलगी होती है जिसका ऊपरी सिरा काला होता है। कलगी खोली और बंद की जा सकती है। बंद रहने पर ऐसा लगता है मानो पक्षी के सिर पर पीछे की ओर दूसरी घुमावदार चोंच हो। फैलने पर कलगी सुंदर गोल पंखा बन जाती है। उड़कर आकर बैठने पर हर बार थोड़ी देर के लिए हुदहुद अपनी कलगी खोलता है। उत्तेजित होने पर या घबराहट में भी वह कलगी खोलता है। उसके पैर छोटे और राख के रंग के होते हैं। वे चलने-दौड़ने के अनुकूल होते हैं। हुदहुद जमीन पर तेज-तेज कुछ दूर दौड़ता है, फिर कुछ देर रुकता है और उसके बाद फिर तेजी से आगे बढ़ जाता है। नर-मादा एक जैसे होते हैं।

हुदहुद विश्व के सभी गरम इलाकों में पाया जाता है। भारत में चौमासे के समाप्त होते ही वह हिमालय छोड़कर भारत के सभी निचाई वाले इलाकों में फैल जाता है। उसे खुले और कम झाड़ियों वाले खेत, घास के मैदान, धूल भरे मार्ग आदि पसंद हैं। धूल में लोटने का भी उसे बड़ा शौक है। हुदहुद समूहचारी पक्षी नहीं है, साधारणतः अकेले ही दिखता है। वह ज्यादा शोर नहीं करता है। जब बोलता है, तब "हु..द...हुद...हू...द" ऐसी उसकी पुकार होती है। इसी कारण उसका नाम हुदहुद पड़ गया है। उसकी आवाज धीमी और कोमल होती है। बोलते समय वह सिर को इस और उस ओर हिलाता है, जिससे यह पता नहीं लग पाता कि आवाज कहां से आ रही है।

हुदहुद ख़ुराक जमीन पर से खोजता है। जमीन के अंदर छिपे कीड़े-मकोड़े, कनखजूरे, छिपकली, दीमक, इल्ली आदि को वह खाता है। उनके लिए वह अपनी लंबी और नुकीली चोंच जमीन पर मारता है। जमीन पर चल रहे कीड़ों को भी वह पकड़ता है। इस तरह वह खेती के लिए उपयोगी है। उसकी उड़ान धीमी और ऊंची-नीची होती हुई होती है। जमीन से अधिक ऊंचाई पर वह नहीं उड़ता। हुदहुद शर्मीला पक्षी नहीं है, मनुष्य को काफी पास तक आने देता है।

उसका घोंसला वृक्ष के किसी कोठर में होता है। मादा उसमें 5-8 अंडे देती है और उन्हें स्वयं सेती है। अंडों को सेती मादा को नर खाना लाकर खिलाता है। चूजों के आने पर नर-मादा दोनों मिलकर उनके लिए भोजन का बंदोबस्त करते हैं।

2 comments:

ACHARYAJI KAHI said...

VERY MUCH INFORMATIVE.
NO DOUBT YOU ARE MAKING BEST UE OF BLOGGING.
WISHING YOUR ALL THE BEST.

Arvind Mishra said...

हुद हुद बोले तो हूप्पी को इस्लाम में पूज्यनीय दर्जा मिला हुआ है !

Post a Comment

 

हिन्दी ब्लॉग टिप्सः तीन कॉलम वाली टेम्पलेट