Thursday, July 30, 2009

कोमोडो ड्रैगन


कोमोडो ड्रैगन दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली है। उसकी लंबाई 3 मीटर (10 फुट) और वजन 180 किलो होता है।

कोमोडो ड्रैगन की जीभ सांप की जीभ के समान फटी हुई होती है। उसके नाखून और दांत बहुत पैने और जबड़े बहुत ही मजबूत होते हैं। अपनी लंबी मांसल पूंछ की कोड़े जैसी मार से वह अपने शत्रुओं को घायल कर सकता है। उसका शरीर कठोर शल्कों से ढका होता है।

कोमोडो ड्रैगन इंदोनीशिया के चार छोटे टापुओं में ही पाया जाता है। उनमें से सबसे बड़े टापू का नाम कोमोडो टापू है।

कोमोडो ड्रैगन एक प्रकार की गोह है। वह मांस-भक्षी है जो मरे जानवरों का मांस भी खाता है और खुद भी शिकार करता है। छोटे कोमोडो ड्रैगन छिपकली, कीड़े-मकोड़े, पक्षी, सांप आदि खाते हैं। जब वे लंबाई में 30 सेंटीमीटर के और उम्र में लगभग एक साल के हो जाते हैं, तो वे मरे जानवरों का मांस खाने लगते हैं। बड़े कोमोडो ड्रैगन हिरण, बकरी, जंगली सूअर आदि का शिकार करते हैं। वे 500 किलो वजन की भैंस तक को मार सकते हैं। कभी-कभी इन खूंखार छिपकलियों ने बच्चों, बूढ़ों और बीमार मनुष्यों पर भी हमला किया है।

कमोडो ड्रैगन एक अत्यंत सफल शिकारी है। उसके लचीले मसूड़ो में 60 से अधिक आरीदार किनारोंवाले, मुंह के अंदर की ओर मुड़े हुए, उस्तरे के समान तेज धारवाले दांत होते हैं। ये दांत उसके जीवनकाल में पांच बार नए सिरे से उगते हैं, इसलिए दांत टूटने से कोमोडो ड्रैगन को अधिक परेशानी नहीं होती। कोमोडो ड्रैगन के दांत शार्क मछली के दांतों के समान होते हैं। कहते हैं कि कोमोडो ड्रैगन के द्वरा जरा सा काटे जाने पर भी मृत्यु हो जाती है। चूंकि वह सड़ा-गला मांस खाता है, इसलिए सड़े-गले मांस में मौजूद अनेक घातक जीवाणु उसके मुंह में होते हैं। काटे जाने पर ये जीवाणु घाव में मिल जाते हैं और इससे काटे गए प्राणी के शरीर में जहर फैल जाता है। कोमोडो ड्रैगन को इससे फायदा ही होता है। यदि शिकार उसकी पकड़ से बच भी गया, तो कुछ ही दिनों में अपने घावों में जहर फैलने से वह मर जाएगा और कोमोडो ड्रैगन उसके शव को ढूंढकर खा जाएगा। कोमोडो ड्रैगन की सूंघने की शक्ति इतनी प्रबल होती है कि वह सड़े मांस को 8 किलोमीटर की दूरी से सूंघ सकता है।

यह खूंखार छिपकली ताकतवर ही नहीं, अत्यंत बुद्धिशाली भी होता है। वह हिरण, सूअर आदि चौकन्ने प्राणियों को भी धोखा देकर पकड़ लेता है। कोमोडो ड्रैगन शिकार करने के लिए जंगली मार्गों के पास लेटा रहता है। मिट्टी के रंग का होने के कारण वह बिलकुल छिपा रहता है। शिकार के मार्ग पर से गुजरने पर वह उसे लपककर पकड़ लेता है।

कोमोडो ड्रैगन भोजन को बड़ी तेजी से निगलता है। सांप की तरह वह भी अपने जबड़ों को खूब फैला सकता है। वह एक बार में पूरे छौने को या सूअर के पूरे सिर को या बकरी के आधे शरीर को निगल सकता है। 50 किलो वजन का कोमोडो ड्रैगन 40 किलो वजन के हिरण को 20 मिनट में चट कर सकता है। कोमोडो ड्रैगन अपने वजन के 80 प्रतिशत जितना मांस एक बार में खा सकता है।

मादा गर्मियों में 30 जितने अंडे देती है। आठ महीने बाद अंडों से आधे मीटर (डेढ़ फुट) लंबे बच्चे निकल आते हैं। पैदा होते ही वे पेड़ों पर चढ़ जाते हैं, वरना बड़े कोमोडो ड्रैगन उन्हें पकड़कर खा जाएंगे। ये बच्चे लगभग एक साल तक पेड़ों पर ही रहते हैं और वहीं से आहार खोजते हैं।

कोमोडो ड्रैगन की आयु लगभग 50 वर्ष होती है।

कोमोडो ड्रैगन दिन भर धीमे-धीमे चलते हुए आहार खोजता रहता है। सामान्यतः वह अकेले ही रहता और शिकार करता है। उसे तटीय इलाकों के वनों में शिकार करना पसंद है। वह सागरतटों पर भी आहार खोजता है और लहरों के साथ बह आई मछलियों और अन्य समुद्री जीवों को खाता है। वह अच्छा तैराक है और एक टापू से दूसरे टापू को तैरकर जाता है। कोमोडो ड्रैगन 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कुछ दूरी तक दौड़ सकता है।

रात को सोने के लिए और दिन में तेज धूप से बचने के लिए कोमोडो ड्रैगन जमीन पर बिल खोदता है। कभी-कभी वह अन्य जानवरों द्वारा खोदे गए बिलों को भी हथिया लेता है।

कोमोडो ड्रैगन 2 कोरड़ वर्षों से इस पृथ्वी पर रहता आ रहा है। पर लगता है कि अब उसके दिन पूरे होते जा रहे हैं। आज उसे एक संकटग्रस्त प्राणी माना जाता है। वन्य अवस्था में केवल 5,000 कोमोडो ड्रैगन ही जीवित बचे हैं। उसे सबसे अधिक खतरा उसके रहने लायक जंगलों के कम होने से है।

8 comments:

Arvind Mishra said...

जानकारी तो जोरदार मगर फोटू रह गयी

गिरिजेश राव said...

आलस बुरी बला है। फोटो लगा

संगीता पुरी said...

सुंदर ज्ञानवर्द्धक आलेख के लिए साधुवाद !!

गिरिजेश राव said...

अन्ने, मेरे बाकी के शब्द कहाँ गए? मैंने लिखा था 'फोटो लगा तमाशा

Pankaj Mishra said...

Very nice knowledge
Thanks

P.N. Subramanian said...

बढ़िया जानकारी. आभार.

Science Bloggers Association said...

Rochak, Romanchak.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

परमजीत बाली said...

ज्ञानवर्द्धक आलेख के लिए धन्यवाद।

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