Friday, May 29, 2009

नागों का राजा नागराज



सचमुच ही विश्व का सबसे डरावना सांप नागराज है। पांच मीटर से भी अधिक लंबा यह फनधारी विषधर हाथी तक को डस कर मार सकता है। वह दुनिया का सबसे लंबा जहरीला सांप भी है। उसका बदन छरहरा और सिर संकरा होता है। हल्के हरे रंग के शरीर पर आड़ी-तिरछी लकीरें होती हैं। उसकी खाल चमकीली होती है। कंठ पीला अथवा नारंगी होता है। अवयस्क नागराज काले होते हैं। उनकी पीठ पर पीले छल्ले होते हैं। नागराज का फन गोल न होकर लंबा और चौकोर होता है।

नागराज भारत, मलेशिया, इंडोनीशिया, फिलिप्पीन्स, बर्मा और चीन में पाया जाता है। भारत में वह हिमालय की तलहटी, पश्चिम बंगाल के सुंदरबन, बिहार, असम, उड़ीसा, पश्चिमी घाट की पहाड़ियों और अंदमान निकोबार द्वीप समूह में मिलता है। वह एक बहुत दुर्लभ सर्प है और केवल घने, नम वनों में रहता है।

यद्यपि वह नाग के कुल का सर्प है, पर उसमें और नाग में अनेक भिन्नताएं हैं। नाग चूहे आदि जीवों को खाता है, जबकि नागराज लगभग पूर्णतः सर्पभक्षी है। नाग के ही समान नागराज में भी फन होता है, पर वह उसे नाग के जितना फैला नहीं सकता। फन फैलाकर नाग नृत्य करने के से लहजे में डोलता है, पर नागराज फन ऊपर उठाए गुस्से से घूरते हुए स्थिर खड़ा रहता है। नाग रेंगते समय फन को बंद कर लेता है, पर नागराज फन को जमीन से लगभग 1 मीटर ऊपर उठाए-उठाए आगे बढ़ सकता है। ऐसा करते हुए वह फुफकारता भी जाता है, जिससे वह बहुत ही डरावना लगता है। पर यदि बिना हिले-डुले चुपचाप खड़ा रहा जाए तो कई बार नागराज बिना कुछ किए ही आगे निकल जाता है।

नागराज का विषदंत लगभग 10 सेंटीमीटर लंबा होता है। उसके विशाल विष-थैलियों में 500 मिलीग्राम तक विष होता है। यद्यपि यह विष नाग या करैत के विष जितना असरकारक नहीं होता, फिर भी नागराज द्वारा डसे जाने पर शरीर में इतना अधिक विष चला जाता है कि मृत्यु अनिवार्य हो जाती है। नागराज द्वारा काटे गए व्यक्ति की 10-15 मिनट में ही मृत्यु हो जाती है। यहां तक कि हाथी तक तीन-चार घंटे में मर जाता है। जंगलों में काम कर रहे पालतू हाथी कई बार इसके डसने से मरे हैं। पर इस विशाल सांप द्वारा मनुष्य के काटे जाने की वारदातें बहुत कम होती हैं, क्योंकि यह सर्प बहुत कम संख्या में पाया जाता है और वह ऐसी जगहों में रहता है जहां मनुष्य नहीं होते।

नागराज दिन में अधिक सक्रिय रहता है। वह अत्यंत फुर्तीला और गुस्सैल स्वभाव का होता है। उसका मुख्य आहार अन्य सांप है, इसलिए उसका नाम "नागराज" सार्थक ही है। वह नाग और करैत जैसे जहरीले सांपों को भी खाता है। उनके विष का उस पर कोई असर नहीं होता। कभी-कभार वह गोहों को भी खाता है। सांपों को पकड़ने में उसका लंबा छरहरा शरीर काफी सहायक होता है। शिकार खोजते हुए वह पेड़ों और चट्टानों पर फुर्ती से चढ़ जाता है। उसे पानी में जाना भी अच्छा लगता है। आत्मरक्षा के लिए भी वह पानी में छिपता है।

मादा अंडों को सेने के लिए दो मंजिला घोंसला बनाती है। इसके लिए वह अपने शरीर के अग्र भाग से वन के फर्श पर पड़े सड़े-गले पत्तों और टहनियों को बुहार कर उनका ढेर लगाती है। फिर इस ढेर में वह दो कक्ष बनाती है। नीचे के कक्ष में वह अंडे देती है और ऊपर के कक्ष में स्वयं अंडों के ऊपर कुंडली मारकर बैठ जाती है। इन घोंसलों का व्यास लगभग एक मीटर होता है। मादा एक बार में 20-40 अंडे देती है। इन अंड़ों को विकसित होने के लिए दो-तीन महीने लगते हैं। इस पूरे दौरान मादा उनके ऊपर घोंसले पर ही बैठी रहती है। नर भी घोंसले के पास ही रहता है। इस तरह घोंसला बनाने का व्यवहार नाग कुल के किसी अन्य सर्प में नहीं पाया जाता।

सामान्यतः मई महीने में अंड़ों से संपोले निकलते हैं। वे अंधे होते हैं और लगभग 50 सेंटीमीटर लंबे होते हैं। उनकी विष-ग्रंथी पूर्ण विकसित होती है और उनके द्वारा डसे जाने पर डसे गए प्राणी की मृत्यु हो सकती है।

नागराज अत्यंत क्रुद्ध स्वभाव का सांप है। प्रजनन काल में वह और भी अधिक चिड़चिड़ा हो जाता है। उसके घोंसले के पास जाने वाले मनुष्यों और अन्य जानवरों पर वह झपट पड़ता है। एक बार एक नागराज की पूंछ के ऊपर से एक अंग्रेज ने अपनी कार चला दी। क्रुद्ध नागराज ने तुरंत फन उठाए उसकी कार का लगभग 100 मीटर तक पीछा किया। मोटरकार की खिड़की के ऊपर तक उसका फन उठ आया। घोंसले पर बैठी मादा के निकट कोई जाए तो वह जोर से फुफकारती हुई अपने शरीर के लगभग एक मीटर लंबे हिस्से को घोंसले से ऊपर उठा लेती है और फन फैलाकर कुत्ते की सी आवाज में गुर्राती है। जब कभी जंगलों में से गुजरने वाली सड़कों के किनारे नागराज घोंसला बना देता है, तब वन विभाग के कर्मचारी इन सड़कों को बंद कर देते हैं क्योंकि सड़क पर जाने वाले लोगों पर नागराज दंपति हमला करते हैं।

नागराज अन्य सांपों की तुलना में काफी बुद्धिमान होता है। चिड़ियाघरों में रखे गए नागराज काफी पालतू बन जाते हैं और उनकी देखरेख करने वाले चिड़ियाघर के कर्मचारी को पहचानने लगते हैं।

चित्र के बारे में

ऊपर के चित्र में जो नागराज दिखाया गया है, उसे गोवा में पकड़ा गया था। उसका वजन 16 किलो और लंबाई 12 फुट 3 इंच है। उसे संभाले हुए हैं, कृष्ण घुले।

5 comments:

P.N. Subramanian said...

सुन्दर जानकारी

Kashif Arif said...

बहुत अच्छी जानकारी देने के लिये ! धन्यवाद

Abhishek Mishra said...

Rochak jaankari.

RAKESH PANDEY said...

THANKS FOR SNAKE KNOWEDGE.PANDIT RAKESH PANDEY BAREILLY U.P. INDIA [BHARAT BARSH]

Anonymous said...

hmm

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